今年,中国电动公交车终于要走上拉丁美洲的街头了。其实,多年前各大电动公交车厂商已经锁定了这个市场,但是却一直很难改变该地区各国对这种新兴技术的怀疑态度。
目前,大多数国家都已经将清洁公共交通转型作为减少碳足迹的首选策略,特别是在在人口规模较大的城市。如今,电动公交车已经在中国实现了批量生产,但是却在进军拉美市场时遭遇了不小阻碍。
据“中拉对话”此前报道,哥伦比亚首都波哥大市在2018年更换了1160辆公交车,但是却拒绝使用中国的电动公交车。整个招标过程也说明了中国车企进军拉美市场的主要障碍:电动公交车比柴油或天然气公交车价格更高,但是当地并没有国家资金用于支持购进公交车的计划,而且当地充电桩总量也不足。此外,专业人员匮乏以及当地对中国产品了解不足也是造成这一困境的原因。
目前,拉美地区能源领域的温室气体排放量增速位居全球前列,然而上述因素却导致电动公交车无法进入这个本该潜力巨大的地区市场。
卡洛斯·莫吉卡、莉莎·温斯蒂和盖伊·爱德华兹三名研究人员共同撰写了一份全面分析拉丁美洲电动汽车市场现状的报告。他们表示:“如果能立即将22个拉美城市的公交汽车和出租车全部替换为电动汽车,那么到2030年该地区将节约近640亿美元的燃料,减少二氧化碳排放3亿吨。”
但是实际上,情形可能会有所发展。2019年上半年,中国电动大巴将首次亮相4个拉美主要城市,上述四个城市的总人口达1400万。此外,还有4个城市计划开展电动公交车试点计划。那么到底是哪四个城市呢?
自2018年12月中旬以来,100辆由中国比亚迪集团生产的电动公交车已经亮相圣地亚哥街头,这让圣地亚哥成为拉丁美洲拥有电动公交车数量最多的城市,同时也是除中国以外,全球电动公交车保有量排名第二的城市。
2019年1月中旬,圣地亚哥快速公交系统(BRT)Transantiago还将新增100辆来自中国宇通公司的电动公交车。如今,圣地亚哥的空气污染和空气质量已经引发了公众的高度关注,而这些公交车将成为实现该市公共交通绿色化的重要推动力。此外,圣地亚哥还将新增490辆柴油公交车,不过这些车辆都将达到环保要求更高的欧VI排放标准。
Transantiago担负着圣地亚哥60%人口的出行需求,而且也已经解决了其他国家尝试引进电动公交车时面临的一些问题。本次交易由塞巴斯蒂安·皮涅拉政府提供资助,他本人曾在2018年12月亲自为首批电动公交车揭幕,并将“电动交通”列为其2018-2022年能源路线图的重要支柱政策之一。除了一些其他承诺之外,该规划还计划在3年内将电动汽车总量增加到现在的10倍。
此外,意大利电力巨头意大利国家电力公司(Enel)也正在与公交运营方进行合作,计划在圣地亚哥安装100个充电桩。
迭戈波塔莱斯大学交通与物流创新中心主任佛朗哥·巴索解释称:“购买电动公交车主要是受交通与电信部购买意向的影响。与以往不同,这次是交通与电信部直接购进了这批车辆,而没有进行招标。加上意大利国家电力公司(Enel)的支持,尤其是充电基础设施方面的支持,从而加快了整个流程。”
世界资源研究所罗斯可持续城市中心研究员达里奥·伊达尔戈表示:“圣地亚哥的这种情况很有意思,因为私人运营商、汽车制造商和配电机构组成了联盟。”
麦德林和卡利(哥伦比亚)
去年年底,麦德林宣布中国汽车厂商比亚迪公司赢得了一项向哥伦比亚出口64辆电动公交车的合同。
今年8月,这批电动汽车将加入当地的Metroplús公交系统,麦德林这个哥伦比亚第二大城市将成为继圣地亚哥之后拉美地区电动汽车保有量第二的城市。本次采购完全由当地政府提供资金。经过招标,比亚迪打败了另外两个竞争者,从而拿下了这笔订单。而那两个竞争者计划提供同样产自中国的,由宇通和中通汽车生产电动公交车。
紧随麦德林的脚步,哥伦比亚第三大城市卡利也在几周前宣布,将在MIO交通系统中新增125辆电动公交车。首批26辆将由中国申沃客车有限公司制造,预计今年5月交付使用。
根据《巴黎气候协定》,哥伦比亚承诺到2040年将7个城市中75%的公交车替换为零排放汽车。而麦德林和卡利也成为哥伦比亚为兑现其承诺而迈出的第一步。
电动汽车技术对哥伦比亚来说有着额外的吸引力,因为该国70%的电力供应都来自水力发电,也就是说哥伦比亚的能源组合比大多数国家都要清洁环保。
为什么这两个城市能够先于首都波哥大引入电动公交车呢?原因就在于波哥大的Transmilenio公交系统主要使用的是铰接式和双铰接式公交车。中国厂商虽然已经在普通电动公交车市场上站稳了脚跟,但铰接式和双铰接式公交车却是他们的短板。
瓜亚基尔(厄瓜多尔)
厄瓜多尔人口最多的城市瓜亚基尔也将在今年迎来20辆比亚迪生产的电动公交车。
但是与圣地亚哥和麦德林不同,瓜亚基尔的这项计划是由当地的一家私人公交运营商Saucinc牵头的。这家只经营一条公交线路的小公司为了用电动公交车替换现有的柴油车辆而不得不向厄瓜多尔政府求助。
与智利的圣地亚哥一样,瓜亚基尔通过国家金融公司(National Finance Corporation,简称CFN)获得了国家特别信贷支持,总额覆盖了购置款的一半。此外,根据当地法律规定,购置电动公交车的企业还将免缴进口关税和增值税。
而厄瓜多尔首都基多可能也会因此受益,因为基多的一家交通运营方目前正在中国考察,而且正考虑进口20到60辆与波哥大模式类似的双铰接式电动公交车。
其他试点项目
目前,至少还有4个拉美城市宣布将在今年进行电动公交车试点,所用车辆基本都是中国制造的。
巴西首都圣保罗共有1.4万辆公交汽车。去年10月该市已经宣布将先投放15辆电动公交车进行试点。这些车辆均来自比亚迪公司在圣保罗附近坎皮纳斯市的工厂,并已于1个月前交付,预计今年3月份投入使用。
今年1月,阿根廷首都布宜诺斯艾利斯也宣布将从5月起投放8辆电动公交车进行试点。本次试点将与意大利国家电力公司(Enel)合作。与其他城市不同的是,试点车辆将同时来自宇通、中通汽车、海格客车和金龙这4家中国制造厂商。
得益于德国和一家当地可持续发展基金会的捐款,哥斯达黎加的圣何塞也将有3辆电动公交车首次上路。此外,这个中美洲国家还通过了一项法律,利用经济奖励措施推动电动交通行业的发展,此举也使其成为该地区低碳交通的先驱。
绿色气候基金(GCF)是《巴黎气候协定》创建的一个为减少温室气体排放提供帮助的金融机制。而乌拉圭政府就向该基金申请了一笔贷款,从而将首都蒙得维的亚的120辆公交车更换成电动车,占其公交车总数的10%。
Wednesday, June 19, 2019
Monday, May 27, 2019
नेपाल में तीन धमाके, चार लोगों की मौत
नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुए तीन धमाकों में चार लोगों की मौत हो गई है और सात लोग घायल हो गए हैं.
नेपाल के स्थानीय टीवी चैनल के टीवी एक धमाका काठमांडू शहर में हुआ है और दो सीमा से लगे इलाके में. नेपाली अख़बार हिमालयन टाइम्स ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि धमाकों की वजह का अभी पता नहीं लग सका है.
पुलिस का कहना है धमाका "इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोज़िव डिवाइस' से किया गया है.
सुरक्षाबलों ने दोनों जगहों की घेराबंदी कर दी है और पड़ताल जारी है.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि धमाके की एक जगह पर एक माओवादी समूह से सम्बन्धित पर्चे मिले हैं.
ये वही माओवादी समूह है जिस पर काठमांडू में इस साल फ़रवरी में धमाके करने का शक़ है. इस धमाके में एक शख़्स की मौत हो गई थी.
हालांकि अब तक किसी समूह या शख़्स ने धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
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पुलिस अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि धमाके में चार में से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और चौथे ने अस्पताल में दम तोड़ दिया.
17 साल के छात्र गोविंद भंडारी ने समाचार एजेंसी रॉययटर्स को बताया, "मैंने ज़ोर की आवाज़ सुनी और फिर जिधर से आवाज़ आई उधर दौड़ा. मैंने देखा कि धमाके की वजह से घर की दीवारों में दरारें आ गई हैं."
साल 2006 में नेपाल में एक दशक तक चला गृहयुद्ध ख़त्म हो गया था और उसके बाद देश का माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा. इसके अगले ही साल यानी 2007 में पहले विद्रोही रहा समूह सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गया था.
हालांकि विद्रोही समूह के कई सदस्य ये कहकर अलग भी हो गए थे कि उनके नेताओं ने मूलभूत क्रांतिकारी विचारों से धोखा किया है.
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लेकिन 2003 में अमरीका ने यह तर्क देकर इराक़ पर हमला किया था तो उसके सारे तर्क ग़लत साबित हुए थे और जो कुछ हासिल हुआ उससे वो ख़ुश भी नहीं था.
ऐसे में ईरान के साथ क्या अमरीका वही ग़लती करेगा जो इराक़ के साथ कर चुका है? कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान के साथ अमरीका युद्ध में जाता है तो वो इराक़ युद्ध से सबक़ के साथ जाएगा.
1979 से ही ईरान संकट को लेकर अमरीका एक किस्म की नकारात्मक राय रखता है. ऐसे में ट्रंप और उनके सलाहकारों के लिए ईरान के ख़िलाफ़ चीज़ों को पेश करने में बहुत दिक़्क़त नहीं होती है.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना है कि मध्य-पूर्व की तमाम समस्याओं की जड़ में ईरान है. लेकिन हक़ीक़त यह है कि आज की तारीख़ में ईरान आक्रामक नहीं है बल्कि अमरीका का सबसे क़रीबी सहयोगी सऊदी अरब ज़्यादा आक्रामक है.
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अनुसार 2017 में सऊदी ने ईरान की तुलना में चार गुना ज़्यादा रक़म सेना पर खर्च किया. हालांकि यह कोई नई बात नहीं है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार ईरान ने 1989 से अब तक रक्षा पर अपनी जीडीपी का 3.3 फ़ीसदी से ज़्यादा खर्च नहीं किया है. इसी अवधि में सऊदी अरब ने हर साल सात फ़ीसदी से ज़्यादा खर्च किया.
सऊदी के हथियार भी ईरान की तुलना में बेहतर हैं. स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब और खाड़ी के उसके सहयोगी दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार हासिल कर रहे हैं जबकि ईरान अपने पुराने हथियारों से ही काम चला रहा है.
ईरान में लगभग सिस्टम शाह के ज़माने के ही हैं. आयात के ज़रिए भी जो हथियार मिले हैं उनमें 1960 और 1980 के दशक के तकनीक हैं.
ईरान की तुलना अगर सैन्य मामलों में इसराइल से किया जाए तो मध्य-पूर्व में उसके सामने कोई टिकता नहीं है. ऐसे में यह कहना कि मध्य-पूर्व की सुरक्षा के लिए ईरान ख़तरा है तो यह तर्क की कसौटी पर बहुत खरा नहीं उतरता.
एक दूसरी बात कही जाती है कि ईरान ने सीरिया में बहुत मज़बूती से हस्तक्षेप किया लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान से ज़्यादा दख़ल सऊदी अरब का रहा है.
सीरिया में ईरान के दख़ल को समझना है तो इराक़-ईरान युद्ध को भी समझना होगा. 1980 में सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था. 20वीं सदी का यह सबसे भयावह ख़ूनी संघर्ष था. इस युद्ध में कम से कम 10 लाख ईरानी मारे गए थे.
इस यु्द्ध में सद्दाम हुसैन ने काफ़ी आक्रामक रुख़ दिखाया था. इराक़ ने इस जंग में रासायनिक हथियारों का भी इस्तेमाल किया था. इस युद्ध में अरब के सभी बड़े देशों और अमरीका ने सद्दाम हुसैन का साथ दिया. अरब का एकमात्र देश सीरिया था जिसने इस युद्ध में ईरान का साथ दिया था.
इसके बाद से सीरिया हर मुश्किल हालात में ईरान के साथ खड़ा रहा. 2011 में सीरिया में बशर अल-असद सरकार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ ईरान का यह डर लाज़िमी था कि अगर सीरिया में अमरीकी परस्त सरकार बनती है तो इसका असर तेहरान की सरकार पर भी होगा और ईरान की शिया मुल्क की पहचान ख़त्म हो सकती है. तुर्की तरह ईरान को डर था कि कहीं सीरियाई कुर्द भी अलग मुल्क के लिए आंदोलन ना शुरू कर दें.
ईरान ने सीरिया में यथास्थिति को बनाए रखने में मदद की. यह वैसा ही था जैसे सऊदी अरब ने बहरीन में शिया प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अपनी फ़ौज भेज दी थी. इसके साथ ही मिस्र में भी 2014 में तख़्तापलट में सऊदी अरब की भूमिका प्रत्यक्ष तौर पर संदिग्ध रही.
सीरिया में ईरान सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता था जबकि सऊदी अरब और खाड़ी के उसके सहयोगियों ने असद विरोधी ताक़तों को मदद की और इन ताक़तों का संबंध जबात अल-नुसरा और स्थानीय अल-क़ायदा से भी था.
डित' बन गया
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Thursday, January 17, 2019
مانشستر سيتي يفوز على ليفربول 2-1 مستعيدا أمله في الدفاع عن لقبه
فاز فريق نادي مانشستر سيتي على فريق
نادي ليفربول بهدفين مقابل واحد في مبارة أقيمت على ملعب الإتحاد الخميس في
الجولة 21 من الدوري الإنجليزي الممتاز.
وقد أحيا هذا الفوز آمال نادي مان سيتي في الدفاع لقبه أمام ليفربول الذي يتصدر حتى الآن الدوري الممتاز. وسجل هدف مانشستر سيتي الأول لاعبه سيرجيو أغويرو من تسديدة قوية من داخل منطقة الجزاء، لم يتمكن أليسون بيكر حارس مرمى ليفربول من صدها.
وفي الدقيقة 46 من المباراة نجح اللاعب البرازيلي فيرمينو في تحقيق هدف التعادل لليفربول من ضربة رأسية قوية استقرت في شباك مرمى مانشستر سيتي.
وتمكن مان سيتي من التقدم بهدف ثان سجله اللاعب ليرو سيني في الدقيقة 72 من المباراة.
وبهذا الفوز قلل مان سيتي من الفارق بينه وبين ليفربول الذي يتصدر جدول ترتيب الدوري الإنجليزي الممتاز برصيد 54 نقطة ولم يخسر أي مباراة في العشرين جولة السابقة.
واحتل مان سيتي التصنيف الثاني بحصوله على 50 نقطة بعد مباراة الخميس، وكان قد خسر في ثلاث مباريات في الجولات السابقة.
أما خلال الموسم الماضي، تقابل الفريقان في أربع مباريات كانت حصة ليفربول الفوز بثلاث منها، اثنتان في دوري أبطال أوروبا حسمهما 3-0 في مباراة الذهاب و 2-1 في مباراة الإياب، والثالثة مباراة الإياب في الدوري الإنجليزي التي انتهت لصالحه 4-3، وكان خسر مباراة الذهاب أمام مان سيتي بخمسة أهداف مقابل صفر.
وكان مدرب فريق مانشيستر سيتي الإسباني، بيب غوارديولا، تعهد عشية مباراة الخميس بتقليل الفارق الذي يفصل فريقه عن ليفربول في تسلسل الدوري الحالي.
وقال متحدثا إلى محطة سكاي سبورت التلفزيونية بعد المباراة إنها" كانت مباراة حقيقية من كلا الجانبين، وقد هزمنا فريقا استثنائيا. لقد كنا متميزين منذ الدقائق الخمس الأولى. وكنا نعلم أن المبارة النهائية هي اليوم، وإذا خسرناها فسنخسر (الدوري) تقريبا".
وكان غوارديولا قد وصف فريق ليفربول في حديث لبي بي سي الاثنين الماضي بأنه "ربما يكون أفضل فريق في أوروبا أو العالم".
وقال يورغن كلوب، مدرب نادي ليفربول للمحطة ذاتها "كان ضغطا كبيرا في مباراة قوية. وكنا غير محظوظين في اللحظات الختامية".
قال الاتحاد الدولي لكرة القدم ( فيفا) إنه يدرس التوسع في عدد الفرق المشاركة في نهائيات كأس العالم 2022 إلى 48 فريقا.
وقال
غياني إنفانتينو في مؤتمر رياضي في دبي إن الفيفا تدرس أيضا إمكانية
استضافة بعض المباريات من قبل دول الجوار لدولة قطر المنظمة لأنشطة الجولة
المقبلة من النهائيات التي يحيط بها الكثير من الجدل منذ أن مُنح حق تنظيمها لهذه الدولة الخليجية الصغيرة.وقال إنفانتينو الشهر الماضي إن أغلبية الفرق الوطنية لكرة القدم تدعم التوسع في عدد المشاركة في نهائيات كأس العالم، مرجحا أن قرارا سوف يُتخذ قبل بداية المباريات المؤهلة لكأس العالم في مارس/آذار المقبل.
وقال رئيس الفيفا "سوف يكون من الصعب على قطر وحدها استضافة جميع مباريات نهائيات كأس العالم حال التوسع في عدد الدول المشاركة".
وصوتت الفيفا في 2017 لصالح زيادة عدد الفرق الوطنية المشاركة في نهائيات كأس العالم إلى 48 فريق بدلا من 32 فريق في جولة 2026، لكن تصريحات توالى ظهورها على لسان إنفانتينو ترجح أنه يميل إلى البدء في زيادة عدد الفرق قبل هذا الموعد.
وأضاف، أثناء المؤتمر الرياضي منذ أيام: "إذا كنتم ترون أنه من الجيد أن يشارك 48 فريق في كأس العالم، وهذا هو ما يدفعنا إلى تحليل إمكانيته، فلماذا لا نجرب ذلك في 2022 قبل الموعد المحدد بأربع سنوات."
وتابع: "تجري مباريات كأس العالم 2022 بمشاركة 32 فريق، وسوف نرى إذا ما كان بالإمكان التوسع في هذا العدد إلى 48 فريق لنسعد العالم، سوف نحاول أو نفعل ذلك."
من جانبها، قالت قطر إنها لن تتخذ "قرارا نهائيا فيما يتعلق بالتوسع في البطولة حتى نطلع على تفاصيل دراسة الجدوى من قبل الفيفا."
ومن المتوقع أن تتضمن الدراسة جداول المباريات، وعدد الملاعب، ومواقع المران، وعدد المباريات التي تُقام يوميا، وفقا للتوسع المحتمل.
وخطت قطر خطوات واسعة في تنفيذ خطة طموحة للانتهاء من البُنى التحتية المطلوبة لتنظيم نهائيات كأس العالم من خلال إنشاء ثمانية ملاعب بتكلفة وغيرها من المنشآت الرياضية تتراوح بين ستة وثمانية مليارات دولار.
وقال رئيس الفيفا: "إذا كان من الممكن أن تستضيف بضع دول جوار قطر عددا من مباريات كأس العالم، فسوف يصب ذلك في مصلحة المنطقة والعالم أجمع."
وأكد أنه يعلم أن هناك توترات بين قطر وعدد من دول الجوار، وأن الأمر يرجع لزعماء تلك الدول فيما يتعلق بالتعامل مع الموقف، لكنه رجح أن الحديث عن مشروع كرة قدم سوف يكون"أسهل بكثير من غيره من الأمور المعقدة".
وأشار إلى أنه من الممكن أن تساعد استضافة دول خليجية بعض مباريات كأس العالم بالتعاون مع قطر "منطقة الخليج على وفي جميع الدول على تطوير كرة القدم وأن تبعث برسالة إيجابية عن اللعبة إلى العالم، أعتقد أن الأمر يستحق التجربة."
وأعلنت السعودية، والإمارات، والبحرين، ومصر مقاطعة الدوحة في يونيو/ حزيران 2017، ما يزيد من تعقيد الموقف على مستوى مشاركة أي من هذه الدول قطر في استضافة مباريات نهائيات كأس العالم 2022.
ومن المقرر أن تنقل منافسات كأس العالم من موعدها التقليدي في يونيو/حزيران ويوليو/تموز بسبب الحرارة الشديدة.
Tuesday, January 1, 2019
هل تظل الإمارات الوجهة المفضلة للباحثين عن الدخل المرتفع؟
طالما عُدت الإمارات وجهة للأجانب أصحاب المهن الساعين لدخل مرتفع، لكن المغتربين على أرض الواقع يقولون إن
الأمور في الإمارات لم تعد كسابق عهدها.
في عام 2016، قررت أليسون
سايمونز، مستشارة الاتصالات، أن تغادر موطنها بالمملكة المتحدة، لتستقر في دبي، حيث الشمس الساطعة، والحياة الاجتماعية الأكثر تفاعلا ونشاطا. لكن لم يكد يمضي عامان حتى عادت سايموندز إلى المملكة المتحدة.وتقول سايمونز إنها أمضت 12 شهرا في البحث عن وظيفة مناسبة، رغم أنها كان لديها شبكة معارف شخصية ومهنية لا يستهان بها في الإمارات، وحتى الوظيفة التي عثرت عليها كانت بعقد مؤقت لمدة عام.
وبالرغم من أن صافي دخلها في الإمارات كان أعلى منه في المملكة المتحدة، لأن الإمارات لا تفرض ضريبة على الدخل، إلا أنها لم تشعر بالأمان الوظيفي بحكم عملها بعقد محدد المدة. وكانت تضطر لدفع إيجارات باهظة لمسكنها وسيارتها بموجب عقود إيجار قصيرة الأجل.
وقبل ثمانية أسابيع من انتهاء عقدها، شرعت سايموندز، البالغة من العمر 45 عاما، في البحث عن وظيفة جديدة. وتقول: "لم أجد أي وظيفة براتب معقول، ولهذا قررت العودة إلى بلدي".
وتردف قائلة: "أود أن أعود إلى هناك مستقبلا، ولكنني أرى أن الأوضاع الآن غير مواتية للعودة والعمل هناك من جديد، إذ زاد عدد المغتربين الذين يغادرون البلاد، ويجد كثير من المهنيين المهرة وذوي الخبرة صعوبة بالغة في العثور على وظائف جديدة".
أصحاب الشركات وسوق العمل
يضم هذا البلد الغني بالنفط ملايين المغتربين، على اختلاف مستوياتهم وجنسياتهم، الذين أغرتهم الدخول المعفاة من الضرائب والشمس الساطعة طوال العام على الانتقال للعيش فيه.
ويعيش معظم الأجانب في أبو ظبي ودبي، مركزي المال والأعمال في الإمارات، واشتهرت دبي أيضا بمنتجعاتها الفاخرة ومبانيها الشاهقة، ومراكز التسوق البراقة، التي جعلت منها وجهة جاذبة للسياح.
وأسهم المغتربون في بناء وإعمار الإمارات التي لم يكن عدد سكانها في عام 1980 يتعدى المليون نسمة، ووفقا لآخر إحصاء يبلغ عدد سكانها اليوم 9.5 مليون نسمة.
وعُرفت الإمارات لسنوات طوال بأنها مقصد للمهنيين الراغبين في الحصول على رواتب مرتفعة ومزايا سخية، مثل بدلات السكن والتعليم لأبنائهم، والرعاية الصحية، وسيارة تحت تصرفهم، وتذاكر السفر، وهذا يتيح للمغترب، الذي لا يعيش حياة الترف والرفاهية، أن يدخّر بعض المال.
إلا أن تعثُر الاقتصاد الإماراتي تحت وطأة تدني أسعار النفط أدى إلى ركود قطاع العقارات وتخفيض الرواتب.
وتقول كارين يوزييل، محللة بوحدة الأبحاث وتحليل المعلومات التابعة لمؤسسة "الإيكونوميست": "بالرغم من تعافي أسعار النفط عالميا في عام 2018، فإن النمو الاقتصادي لا يزال متواضعا".
ويعزى ذلك على حد قولها إلى قرار منظمة "أوبك" بخفض إنتاج النفط، بالإضافة إلى عوامل جيوسياسية أخرى، مثل قطع العلاقات الدبلوماسية مع قطر، والعقوبات الأمريكية المفروضة على إيران، التي أثرت على التبادل التجاري بين البلدين، ولا سيما المصالح التجارية الإيرانية في دبي.
وتضيف يوزييل أن ضريبة القيمة المضافة، التي فرضتها الحكومة في يناير/ كانون الثاني بنسبة 5 في المئة، في محاولة لسد الفجوة في الإيرادات التي خلفها تدني أسعار النفط، أسهمت في تغيير نظرة رواد الأعمال للإمارات التي باتت تعد واحدة من مراكز المال والأعمال العالمية. كما أثّرت الضريبة على الاستهلاك الخاص بشكل واضح، إثر ارتفاع أسعار المأكولات والأنشطة الترفيهية والسلع الاستهلاكية.
نظريا، توقع صندوق النقد الدولي في أحد تقاريره أن يحقق الناتج المحلي الإجمالي في الإمارات سنة 2019 نموا بنسبة 3.7 في المئة، ولكن مؤشر بنك الإمارات دبي الوطني لمراقبة حركة الاقتصاد، كشف في نوفمبر/ تشرين الثاني عن تراجع نمو القطاع الخاص إلى أدنى مستوى له منذ عامين ونصف، وشهد مؤشر التوظيف أيضا تراجعا للشهر الثاني على التوالي.
وأشارت صحيفة "وول ستريت جورنال" في مقال حديث، إلى أن الكثير من المهنيين، ولا سيما أصحاب الدحول المرتفعة، تركوا وظائفهم في دبي فيما أطلق عليه بعض الاقتصاديين ظاهرة "استنزاف المهنيين".
لكن أحد الخبراء الاقتصاديين الإماراتيين يقول إن هذا المقال ينطوي على بعض المبالغة، رغم أنه يشعر بتفاؤل حذر حيال النمو الاقتصادي، إذ يرى أن الاقتصاد الإماراتي يخضع لبعض "الاجراءات التصحيحية" مع بلوغه مرحلة النضج.
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