Thursday, August 30, 2018

पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है?

औरतों में माहवारी एक बुनियादी अमल है. यही क़ुदरती अमल उसे समाज में औरत का दर्जा दिलाता है. कहना ग़लत नहीं होगा कि इंसानी कायनात का दारोमदार इसी पर टिका है.
माहवारी से पहले और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और ख़ुद से लड़ाई चलती रहती है. उसके मिज़ाज में बहुत से बदलाव नज़र आने लगते हैं. प्राचीन काल में इसे औरत को पड़ने वाले दौरे के तौर पर देखा जाता था.
यहां तक कि मिस्र से लेकर ग्रीस के दार्शनिकों का मानना था कि हर महीने औरत के मन में सेक्सुअल डिज़ायर का उफ़ान उठता है. जब ये डिज़ायर पूरी नहीं होती तो उसके शरीर से ख़ून का रिसाव शुरू हो जाता है.
ये सही बात है कि माहवारी शुरू होने से पहले औरत के मूड में बदवाल आता है. उसका मिज़ाज चिड़चिड़ा हो जाता है. शरीर के किसी ना किसी हिस्से में अजीब खिंचाव या दर्द होने लगता है. ये कैफ़ियत इशारा करती है कि अब बस कुछ ही वक़्त में ब्लीडिंग शुरू होने वाली है.
लेकिन ऐसी कैफ़ियत सभी औरतों की हो ये ज़रूरी नहीं है. कुछ महिलाओं को दर्द बहुत ज़्यादा होता है, कुछ को कम. जबकि कुछ को नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त दर्द होता है. आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि औरत की ये कैफ़ियत सेक्स से महरूमी के सबब होती है.
यही वजह है कि आज भी कम पढ़े-लिखे लोग लड़कियों को समझाते हैं कि शादी के बाद दर्द की ये शिकायत दूर हो जाएगी. लेकिन मॉडर्न साइंस और रिसर्च माहवारी के दौरान महिलाओं में होने वाले इस बदलाव के कई पॉज़िटिव पहलू देखती है.ई रिसर्च के मुताबिक़, माहवारी पूरी होने के बाद औरतों में ख़ास तरह की जागरूकता बढ़ जाती है. माहवारी के तीन हफ़्ते बाद उनके कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हो जाते हैं. जिन बातों को दूसरे लोग कहने में डरते हैं, उन्हें वो खुलकर कह देती हैं. जैसे ही माहवारी का नया चक्र शुरू होता है, उनका ज़हन तेज़ी से काम करना शुरू कर देता है.
पुराने दौर में लोग मानते थे कि औरत के मिज़ाज में ये बदलाव पेट में चल रही उथल-पुथल की वजह से होते हैं. जबकि इन बदलावों का सोर्स अंडाशय है, जहां ओएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के दो हार्मोन पूरे महीने अलग-अलग मात्रा में निकलते रहते हैं और पेट की दीवार के चारों तरफ़ एक चादर बनाते हैं. यही हार्मोन फ़ैसला करते हैं कि अंडा कब तैयार करना है. इसी हार्मोन की वजह से औरत की सेहत और मिज़ाज दोनों पर असर पड़ता है.
माहवारी चक्र पर 1930 के दशक से रिसर्च की जा रही है. वैज्ञानिकों के लिए भी ये रिसर्च का दिलचस्प विषय है. इसकी प्रेरणा उन्हें सिर्फ़ महिलाओं की बायोलॉजी समझने से नहीं मिली है. बल्कि इस बात से मिली की औरतें, मर्दों से किन मायनों में और कितना अलग हैं. इन दोनों के बीच फ़र्क़ की बुनियादी मिसाल हमारे दिमाग़ में है.
ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट मार्कस हसमैन के मुताबिक़, वर्षों तक यही माना जाता रहा कि मर्द और औरत दोनों अपने हार्मोन की वजह से हर महीने इस तरह के चक्र से गुज़रते हैं. औरतों में माहवारी होती है और मर्दों में टेस्टोस्टोरोन का स्तर बढ़ता घटता है. जबकि औरतों का दिमाग़ मर्दों से अलग काम करता है. उनके दिमाग़ की थ्योरी मर्दों से बेहतर होती है. यही वजह है कि उनके कम्युनिकेशन और सोशल स्किल मर्दों से बेहतर होते हैं.
शिकागो यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक पाउलिन मकी का कहना है कि औरतों का ज़हन किसी भी शब्द की हिज्जे मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से याद रखता है. यही नहीं औरतें मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से बोलती हैं और उनके ज़हन में दर्ज लफ़्ज़ों की तादाद, मर्दों से ज़्यादा होती है.
माना जाता है कि हज़ारों वर्ष पहले औरतें अपने बच्चों को अच्छे-बुरे के बीच फ़र्क़ करने के उपदेश देती रही हैं, शायद इसलिए भी लड़कियों को बोलने की प्रैक्टिस अच्छी होती है. लेकिन क्या इस वजह के पीछे भी हार्मोन ज़िम्मेदार हैं, ये बड़ा सवाल है.
इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए मनोवैज्ञानिक पाउलिन मकी ने बाल्टीमोर के जेरोन्टॉलजी रिसर्च सेंटर के कुछ रिसर्चर के साथ मिलकर एक तजुर्बा किया. उन्होंने ये पता लगाने की कोशिश की कि औरतों में ओएस्ट्रोजन का बढ़ता-घटता स्तर हर महीने उन पर कैसा और कितना असर डालता है. इसके लिए उन्होंने दो स्तर पर तजुर्बा शुरू किया. हालांकि इस तजुर्बे का सैंपल साइज़ छोटा था. केवल 16 महिलाएं ही प्रतिभागी थीं. इन सभी का पीरियड शुरू होने से पहले और पीरियड ख़त्म होने के बाद का बर्ताव देखा गया.
रिसर्च के नतीजे हैरान करने वाले थे. सभी प्रतिभागी महिलाओं में जिस वक़्त फ़ीमेल हार्मोन का स्तर ज़्यादा था, तो वो मर्दों के मुक़ाबले चीज़ें याद रखने में कमज़ोर थीं. लेकिन जब फ़ीमेल हार्मोन का स्तर कम हुआ तो उनकी ये कमज़ोरी दूर हो गई. वो मर्दों के मुक़ाबले नए शब्द तेज़ी से याद रखने लगीं.
जिन शब्दों की अदायगी को लेकर संशय बना रहता है, उन्हें महिलाएं तेज़ी से और बिल्कुल सही समझ लेती हैं. बेहतर कम्युनिकेशन के लिए इसे ख़ूबी माना जाता है. अपनी रिसर्च के बुनियाद पर मनोवैज्ञानिक मकी मानती हैं कि औरतों में हर महीने होने वाले इस बदलाव की वजह ओएस्ट्रोजन हार्मोन है.

Wednesday, August 15, 2018

联合国:中国秘密囚禁百万维族人对其政策“洗脑”

联合国消除种族歧视委员会称有“可靠情报”,证明中国在新疆的“反极端主义中心”秘密囚禁百万维吾尔族人。
由俞建华率领的中国代表团在为期两天的日内瓦中国政策审核会上对联合国专家提出的问题给予答复。
中国代表团在大会发言时指出,"没有随意的监禁,根本不存在'再教育中心'"。
中方说,新疆自治区政府在打击"暴力恐怖活动"的同时,给罪行确凿的犯罪分子学习生活技能、重新融入社会的机会,地点在职业教育和就业培训中心。
中国代表团一名胡姓成员通过翻译表示,"将100万维族人关押在再教育中心的说法完全同事实不符。"
他补充道,"没有压迫少数民族,没有打着反恐旗号剥夺宗教自由。"但他说,那些被宗教极端主义分子迷惑的人,理应得到帮助,重返社会和重获教育权利。
联合国消除种族歧视委员会发表报告之际,宁夏自治区就发生穆斯林回族相关事件,有回族人不满当局试图拆卸一座清真寺,与警方发生对峙。
海内外中国民主人士发起联署,抗议对维吾尔人的野蛮暴行,要求中共立即停止政治迫害。而中国官媒《环球时报》发表社评表示,"捍卫新疆和平稳定,就是最大的人权"。
全球40多名中国学者和异议人士,联名呼吁外界关注新疆正在发生的人权灾难,包括《北京之春》荣誉主编胡平、前六四学生领袖王丹、流亡维权律师滕彪等人。
联署呼吁美国政府继续为新疆人权发声,进一步采取有效手段向中共当局施压,呼吁联合国出面调查,并谴责发生在新疆的恶劣行径。
联合国消除种族歧视委员会,星期五(8月10日)在日内瓦开始审议中国履行《消除一切形式种族歧视国际公约》报告。
在首日聆讯上,美国籍委员、人权律师盖伊‧麦克杜格尔( )提出,根据可靠情报,中国涉嫌将百万名维吾尔族穆斯林,送到秘密的“政治再教育营”扣留,以打击当局所谓的“宗教极端主义”。麦克杜格尔表示,委员会对有关情况“深表关注”。
维吾尔族人占新疆人口约45%,过去几个月已多次传出穆斯林被扣留的消息。
BBC驻日内瓦记者福克斯( )报道称,国际特赦组织与人权观察等国际民间组织,向委员会提交有关证据,称当局强迫被关押的维族人听政府的政策宣讲。
代表流亡维族人、被北京定性为“暴力恐怖组织”的世界维吾尔代表大会表示,被扣押的人经常要挨饿,“再教育营”内的酷刑虐待行为普遍,而这些人并没有被起诉任何罪行,亦无法通过法律途径维权。
海外人权团体之前已多次提出有关秘密“再教育营”的问题,美国新奥尔良罗耀拉大学历史系助理教授莱恩‧图姆( )今年5月在《纽约时报》撰文,称中国自2016年以来,至少耗资六亿八千万元人民币,在新疆各地兴建拘留设施。
在4月,美国高级外交官石露蕊(Laura Stone)称,数以万计的人被扣留在“再教育营”,中国外交部反驳,指新疆各族人民安居乐业。
中国代表团团长,中国常驻联合国日内瓦办事处代表俞建华,在联合国消除种族歧视委员会开场发言中表示,今年3月全国“两会”通过的《宪法》修正案,提出要“维护和发展各民族的平等团结互助和谐关系”。俞建华称,在中国政府的努力下,“民族地区经济大幅发展,人民生活水平持续提高”,“不断提高少数民族享受各项人权的水平”。
中国去年4月实施的《新疆维吾尔自治区去极端化条例》,将维族女人穿戴罩袍、男人蓄须等行为,与极端主义相提并论,并加以禁止。
世维会今年7月发放消息,称身穿长身外衣的维族女性,被人当街剪短衣服,迫使她们放弃穆斯林传统。
人权观察亦在5月份发表报告,称中共在新疆扩大“结对认亲”运动,要求党员干部到穆斯林家庭居住,向穆斯林宣传社会主义价值观。中共新疆自治区党委书记陈全国今年2月接受《人民日报》专访时表示,全疆百万干部职工与结对认亲户“同吃同住同劳动”,在冬至期间一起按照华北汉人习俗食饺子,“亲如一家、其乐融融”。
就在联合国委员质疑新疆穆斯林人权状况之际,宁夏自治区同心县星期四起,有数百名回族穆斯林,到县城韦州清真大寺外聚集,阻止当局拆卸清真寺。