الممثل والمخرج الأميركي شون بن من أشهر ممثلي
هوليوود، وفاز بجوائز أوسكار عدة، تناقلت وكالات أنباء عالمية صوراً له
الأسبوع الماضي وهو يقوم بجولة خارج القنصلية السعودية في إسطنبول لإعداد فيلم وثائقي عن قضية مقتل جمال خاشقجي، وقال إن السبب الرئيس لإنتاجه هذا الفيلم حتى لا تنسى الجريمة.
يخطئ الكثير منا إذا ما استشهدوا
بكتّاب ومفكرين غربيين وبعض الممثلين مثل الممثل شون بن إذا خاضوا في قضايانا وكأنهم يملكون الحقيقة المطلقة عن قضايانا، وأنهم أناس موضوعيون في
طرحهم وأنهم مخلصون لفكرهم وفنهم، إنهم لا يختلفون إلا فيما ندر عن البقية
الباقية في العالم الذين لهم أسعارهم (يشترون ويباعون) ولكل قيمته، وقد تختلف طرق الدفع لهم خوفاً من التشريعات في بلادهم التي تحظر مثل هذه المتاجرة البجحة، ولكن هناك أساليب وفنون يسمح لهم بالاسترزاق عن طريقها
بشكل مشروع كما هي شركات العلاقات العامة أو الدخول في عملية الإنتاج وصناعة السينما.
أستغرب أن يكون همّ صناعة السينما في أميركا هو مثل
هذه القضية، وكأن قضايا الشعوب الغربية انتهت، فلا يوجد اضطهاد وقتل مريع هناك، إنها «المادة» هي من تجعل هذا الممثل يهتم بهذه القضية التي ما زالت
في أروقة المحاكم ولم تنتهِ بعد.
لا
شك عندي أن هذا الفيلم المدفوع الأجر من أعداء المملكة، خاصة في قطر وتركيا، هم من يقفون خلفه من باب المتاجرة في دم خاشقجي، واستمراراً في الحملات الدعائية السوداء ضد المملكة، أي أنه توظيف رخيص للفن في هذا
السياق.
هناك علاقة وثيقة بين أجهزة الاستخبارات الأميركية والغربية
وصناعة السينما في تلك الدول، وقد نستغرب مثلاً قلة الأفلام السينمائية
التي تعرضت مثلاً لأحداث الـ11 عشر من سبتمبر، ويبدو أن الأجهزة
الاستخبارية هناك لا تريد أن تصور تلك المأساة التي جرحت الكبرياء الأميركي
وأظهرت فشل تلك الأجهزة أو حقائق وتساؤلات حول ذلك الحادث، على رغم أنه يمثل قصةً وحدثاً يمكن أن يوظف في المئات من الأفلام.
قد لا أكون بعيداً أن مثل هذا الفيلم لا يخرج عن الأفلام التي نشاهدها في السينما
الأميركية التي تشوه صورة العرب والمسلمين وتؤكد على صورتهم النمطية هناك،
ولكن للأسف هذه المرة بأموال عربية من قطر أو من جهات تابعة لها، إذا كانت
القضية لها علاقة بحقوق الإنسان وقضايا الحرية في منطقتنا وإذا كانت تهم
الغرب فهناك قضايا مأسوية لا تقارن بقضية خاشقجي.
العالم المتحضر إذا كان يؤمن بتلك المبادئ بعيداً عن السياسة والمصالح وتهييج الشعوب في
منطقتنا فأين هم من الصور المرعبة التي حدثت لآلاف المدنيين وأغلبهم من
الأطفال الذين قضوا في سورية عندما استخدمت ضدهم الغازات الكيماوية. أتمنى
من عائلة خاشقجي، وهي صاحبة الحق في هذه القضية، أن تقف ضد مثل هؤلاء المرتزقة في استخدامها ضد وطنهم ووطننا جميعاً.
Tuesday, December 11, 2018
Thursday, August 30, 2018
पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है?
औरतों में माहवारी एक बुनियादी अमल है. यही क़ुदरती अमल उसे समाज में औरत का दर्जा दिलाता है. कहना ग़लत नहीं
होगा कि इंसानी कायनात का दारोमदार इसी पर टिका है.
माहवारी से पहले
और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और ख़ुद से लड़ाई चलती रहती है. उसके
मिज़ाज में बहुत से बदलाव नज़र आने लगते हैं. प्राचीन काल में इसे औरत को
पड़ने वाले दौरे के तौर पर देखा जाता था.यहां तक कि मिस्र से लेकर ग्रीस के दार्शनिकों का मानना था कि हर महीने औरत के मन में सेक्सुअल डिज़ायर का उफ़ान उठता है. जब ये डिज़ायर पूरी नहीं होती तो उसके शरीर से ख़ून का रिसाव शुरू हो जाता है.
ये सही बात है कि माहवारी शुरू होने से पहले औरत के मूड में बदवाल आता है. उसका मिज़ाज चिड़चिड़ा हो जाता है. शरीर के किसी ना किसी हिस्से में अजीब खिंचाव या दर्द होने लगता है. ये कैफ़ियत इशारा करती है कि अब बस कुछ ही वक़्त में ब्लीडिंग शुरू होने वाली है.
लेकिन ऐसी कैफ़ियत सभी औरतों की हो ये ज़रूरी नहीं है. कुछ महिलाओं को दर्द बहुत ज़्यादा होता है, कुछ को कम. जबकि कुछ को नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त दर्द होता है. आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि औरत की ये कैफ़ियत सेक्स से महरूमी के सबब होती है.
यही वजह है कि आज भी कम पढ़े-लिखे लोग लड़कियों को समझाते हैं कि शादी के बाद दर्द की ये शिकायत दूर हो जाएगी. लेकिन मॉडर्न साइंस और रिसर्च माहवारी के दौरान महिलाओं में होने वाले इस बदलाव के कई पॉज़िटिव पहलू देखती है.ई रिसर्च के मुताबिक़, माहवारी पूरी होने के बाद औरतों में ख़ास तरह की जागरूकता बढ़ जाती है. माहवारी के तीन हफ़्ते बाद उनके कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हो जाते हैं. जिन बातों को दूसरे लोग कहने में डरते हैं, उन्हें वो खुलकर कह देती हैं. जैसे ही माहवारी का नया चक्र शुरू होता है, उनका ज़हन तेज़ी से काम करना शुरू कर देता है.
पुराने दौर में लोग मानते थे कि औरत के मिज़ाज में ये बदलाव पेट में चल रही उथल-पुथल की वजह से होते हैं. जबकि इन बदलावों का सोर्स अंडाशय है, जहां ओएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के दो हार्मोन पूरे महीने अलग-अलग मात्रा में निकलते रहते हैं और पेट की दीवार के चारों तरफ़ एक चादर बनाते हैं. यही हार्मोन फ़ैसला करते हैं कि अंडा कब तैयार करना है. इसी हार्मोन की वजह से औरत की सेहत और मिज़ाज दोनों पर असर पड़ता है.
माहवारी चक्र पर 1930 के दशक से रिसर्च की जा रही है. वैज्ञानिकों के लिए भी ये रिसर्च का दिलचस्प विषय है. इसकी प्रेरणा उन्हें सिर्फ़ महिलाओं की बायोलॉजी समझने से नहीं मिली है. बल्कि इस बात से मिली की औरतें, मर्दों से किन मायनों में और कितना अलग हैं. इन दोनों के बीच फ़र्क़ की बुनियादी मिसाल हमारे दिमाग़ में है.
ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट मार्कस हसमैन के मुताबिक़, वर्षों तक यही माना जाता रहा कि मर्द और औरत दोनों अपने हार्मोन की वजह से हर महीने इस तरह के चक्र से गुज़रते हैं. औरतों में माहवारी होती है और मर्दों में टेस्टोस्टोरोन का स्तर बढ़ता घटता है. जबकि औरतों का दिमाग़ मर्दों से अलग काम करता है. उनके दिमाग़ की थ्योरी मर्दों से बेहतर होती है. यही वजह है कि उनके कम्युनिकेशन और सोशल स्किल मर्दों से बेहतर होते हैं.
शिकागो यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक पाउलिन मकी का कहना है कि औरतों का ज़हन किसी भी शब्द की हिज्जे मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से याद रखता है. यही नहीं औरतें मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से बोलती हैं और उनके ज़हन में दर्ज लफ़्ज़ों की तादाद, मर्दों से ज़्यादा होती है.
माना जाता है कि हज़ारों वर्ष पहले औरतें अपने बच्चों को अच्छे-बुरे के बीच फ़र्क़ करने के उपदेश देती रही हैं, शायद इसलिए भी लड़कियों को बोलने की प्रैक्टिस अच्छी होती है. लेकिन क्या इस वजह के पीछे भी हार्मोन ज़िम्मेदार हैं, ये बड़ा सवाल है.
इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए मनोवैज्ञानिक पाउलिन मकी ने बाल्टीमोर के जेरोन्टॉलजी रिसर्च सेंटर के कुछ रिसर्चर के साथ मिलकर एक तजुर्बा किया. उन्होंने ये पता लगाने की कोशिश की कि औरतों में ओएस्ट्रोजन का बढ़ता-घटता स्तर हर महीने उन पर कैसा और कितना असर डालता है. इसके लिए उन्होंने दो स्तर पर तजुर्बा शुरू किया. हालांकि इस तजुर्बे का सैंपल साइज़ छोटा था. केवल 16 महिलाएं ही प्रतिभागी थीं. इन सभी का पीरियड शुरू होने से पहले और पीरियड ख़त्म होने के बाद का बर्ताव देखा गया.
रिसर्च के नतीजे हैरान करने वाले थे. सभी प्रतिभागी महिलाओं में जिस वक़्त फ़ीमेल हार्मोन का स्तर ज़्यादा था, तो वो मर्दों के मुक़ाबले चीज़ें याद रखने में कमज़ोर थीं. लेकिन जब फ़ीमेल हार्मोन का स्तर कम हुआ तो उनकी ये कमज़ोरी दूर हो गई. वो मर्दों के मुक़ाबले नए शब्द तेज़ी से याद रखने लगीं.
जिन शब्दों की अदायगी को लेकर संशय बना रहता है, उन्हें महिलाएं तेज़ी से और बिल्कुल सही समझ लेती हैं. बेहतर कम्युनिकेशन के लिए इसे ख़ूबी माना जाता है. अपनी रिसर्च के बुनियाद पर मनोवैज्ञानिक मकी मानती हैं कि औरतों में हर महीने होने वाले इस बदलाव की वजह ओएस्ट्रोजन हार्मोन है.
Wednesday, August 15, 2018
联合国:中国秘密囚禁百万维族人对其政策“洗脑”
联合国消除种族歧视委员会称有“可靠情报”,证明中国在新疆的“反极端主义中心”秘密囚禁百万维吾尔族人。
由俞建华率领的中国代表团在为期两天的日内瓦中国政策审核会上对联合国专家提出的问题给予答复。中国代表团在大会发言时指出,"没有随意的监禁,根本不存在'再教育中心'"。
中方说,新疆自治区政府在打击"暴力恐怖活动"的同时,给罪行确凿的犯罪分子学习生活技能、重新融入社会的机会,地点在职业教育和就业培训中心。
中国代表团一名胡姓成员通过翻译表示,"将100万维族人关押在再教育中心的说法完全同事实不符。"
他补充道,"没有压迫少数民族,没有打着反恐旗号剥夺宗教自由。"但他说,那些被宗教极端主义分子迷惑的人,理应得到帮助,重返社会和重获教育权利。
联合国消除种族歧视委员会发表报告之际,宁夏自治区就发生穆斯林回族相关事件,有回族人不满当局试图拆卸一座清真寺,与警方发生对峙。
海内外中国民主人士发起联署,抗议对维吾尔人的野蛮暴行,要求中共立即停止政治迫害。而中国官媒《环球时报》发表社评表示,"捍卫新疆和平稳定,就是最大的人权"。
全球40多名中国学者和异议人士,联名呼吁外界关注新疆正在发生的人权灾难,包括《北京之春》荣誉主编胡平、前六四学生领袖王丹、流亡维权律师滕彪等人。
联署呼吁美国政府继续为新疆人权发声,进一步采取有效手段向中共当局施压,呼吁联合国出面调查,并谴责发生在新疆的恶劣行径。
联合国消除种族歧视委员会,星期五(8月10日)在日内瓦开始审议中国履行《消除一切形式种族歧视国际公约》报告。
在首日聆讯上,美国籍委员、人权律师盖伊‧麦克杜格尔( )提出,根据可靠情报,中国涉嫌将百万名维吾尔族穆斯林,送到秘密的“政治再教育营”扣留,以打击当局所谓的“宗教极端主义”。麦克杜格尔表示,委员会对有关情况“深表关注”。
维吾尔族人占新疆人口约45%,过去几个月已多次传出穆斯林被扣留的消息。
BBC驻日内瓦记者福克斯( )报道称,国际特赦组织与人权观察等国际民间组织,向委员会提交有关证据,称当局强迫被关押的维族人听政府的政策宣讲。
代表流亡维族人、被北京定性为“暴力恐怖组织”的世界维吾尔代表大会表示,被扣押的人经常要挨饿,“再教育营”内的酷刑虐待行为普遍,而这些人并没有被起诉任何罪行,亦无法通过法律途径维权。
海外人权团体之前已多次提出有关秘密“再教育营”的问题,美国新奥尔良罗耀拉大学历史系助理教授莱恩‧图姆( )今年5月在《纽约时报》撰文,称中国自2016年以来,至少耗资六亿八千万元人民币,在新疆各地兴建拘留设施。
在4月,美国高级外交官石露蕊(Laura Stone)称,数以万计的人被扣留在“再教育营”,中国外交部反驳,指新疆各族人民安居乐业。
中国代表团团长,中国常驻联合国日内瓦办事处代表俞建华,在联合国消除种族歧视委员会开场发言中表示,今年3月全国“两会”通过的《宪法》修正案,提出要“维护和发展各民族的平等团结互助和谐关系”。俞建华称,在中国政府的努力下,“民族地区经济大幅发展,人民生活水平持续提高”,“不断提高少数民族享受各项人权的水平”。
中国去年4月实施的《新疆维吾尔自治区去极端化条例》,将维族女人穿戴罩袍、男人蓄须等行为,与极端主义相提并论,并加以禁止。
世维会今年7月发放消息,称身穿长身外衣的维族女性,被人当街剪短衣服,迫使她们放弃穆斯林传统。
人权观察亦在5月份发表报告,称中共在新疆扩大“结对认亲”运动,要求党员干部到穆斯林家庭居住,向穆斯林宣传社会主义价值观。中共新疆自治区党委书记陈全国今年2月接受《人民日报》专访时表示,全疆百万干部职工与结对认亲户“同吃同住同劳动”,在冬至期间一起按照华北汉人习俗食饺子,“亲如一家、其乐融融”。
就在联合国委员质疑新疆穆斯林人权状况之际,宁夏自治区同心县星期四起,有数百名回族穆斯林,到县城韦州清真大寺外聚集,阻止当局拆卸清真寺。
Monday, July 30, 2018
城市、企业和投资:中国气候领导力的新源泉
由于特朗普政府正在考虑让美国退出《巴黎协定》,并且已经开始削弱国内的气候政策,所有人都把目光投向了中国,看这个世界最大的排放国能否填补美国留下的领导空缺。
习近平主席将2015年的《巴黎协定》称为“气候治理进程中的里程碑”,承诺将坚决兑现中国在此框架下的承诺。但是,正如乔安娜·刘易斯和李硕在“中外对话”文章中指出的那样,全球领导者不仅需要尽好自己的本分,还要拥有更广阔的视野,激励和引导其他国家踏上正轨。
问题在于如何才能做到这一点。中国的外交立场不太可能在一夜之间改变。因此,要实现成为全球治理领导者的雄心,保护“来之不易”的巴黎协定,中国必须探索气候领导的新道路。幸运的是,如徐安琪和卡琳·罗森加滕在中外对话文章中所说,可以用“实际领导”对传统的外交领导进行补充。实际上,在不断演变的气候体制中,“实际领导”已经变得越来越重要。在此语境下,城市和商业网络以及海外基础设施投资等非传统的外交影响渠道为中国铺设了坚实的前进道路。
由内而外的领导力
尽管中国口头上说将负起领导责任、支持巴黎协定,但还没有迹象表明它将在外交上积极推动国际气候体制的强化,或者督促其他国家扩展气候宏图。因为这些措施对中国来说是外交上的一个重大转折,如果出现,也只会以缓慢渐进的方式出现。同时,中国也不太可能正式将巴黎协定中承诺的在2030年达到排放峰值的时间提前。
那么中国怎样才能在全球气候政策中发挥积极而坚定的作用呢?这就亟需为其找到超越传统外交的气候领导新路径。幸运的是,中国政府手上已经有了新的政策工具。
自下而上的行动潜力
采取气候行动的不仅是各国政府,城市、企业、社会团体和其他非国家行为主体也都在努力应对气候变化(如今都集结在联合国的气候问题解决方案非国家行动者(NAZCA)平台之下)。2015年的联合国巴黎气候大会在政府间机制的中心掀起了一场非国家气候行动的“海啸”。
尽管这一变化是一个重要突破,但仍面临着巨大的挑战。未来世界上大部分排放将来自发展中国家,同时它们也将遭受气候变化最严重的打击。但研究表明大多数非国家气候行动仍然集中在发达国家;而那些自下而上将各国的非国家行为体联系起来的气候倡议也主要是由发达国家行为体发起和领导的。
在国际层面,中国似乎远远落在后面。中国的总排放量是印度的五倍,但在跨国网络中采取气候行动的印度城市、省邦、企业和其他非国家行为体的数量却是中国的两倍之多。
但在地方层面上,中国开展了大量气候行动,国有和私有企业同样积极。比如,中国达峰先锋城市联盟的宗旨就是赶在国家目标之前达到城市的排放峰值。但是,这项行动的大部分与国际网络并无联系。因此,中国政府可以通过帮助本国的地方行为主体在跨国网络中发挥更大作用,来强化国内政策,彰显其国际领导地位。
让中国的省、市、以及企业更有力地融入各个跨国气候行动网络(如C40气候城市领导联盟、全球商业气候联盟和Compact of States and Regions等),可以迅速拓宽这些网络的覆盖面,同时给中国的地方和非国家行为主体带来重要的信息、人脉和融资机遇。
通过这种方式,中国不必实质上改变其传统谈判立场也能迅速提升其国际气候领导力。中国政府发出参与这些网络的有力信号也将鼓励省、市、企业进一步开展气候行动,并将其与全世界(尤其是其他发展中国家)的同道们联系在一起。
有些人担心“自下而上”的方式将导致权力从中央政府转移到地方政府和企业手中,但这种担忧是有偏差的。城市和商业网络的自发性和合作性意味着它们不仅不会威胁到国家主权,反过来还会帮助各国政府更有效地实现其承诺的国家目标,同时以明显的进展证据来支撑国家的外交立场。
“绿化”海外基础设施投资
中国正在成为很多国家最大的基础设施投资来源。通过亚洲基础设施投资银行(亚投行)、新开发银行(金砖银行)等机构和“一带一路”计划,以及中国的国家开发银行和大型商业银行的贷款和基础设施建设企业的行动,未来若干年中国将在很多国家的基础设施选择中发挥决定性作用。
坦率地说,如果这个影响力转化为碳密集的基础设施,将让巴黎协定的目标化为泡影。但若非如此,它也可能为世界经济未来数十年的去碳化提供所需的大笔资金。
幸运的是,中国非常重视绿色金融。亚投行和金砖银行首批开展的一些项目都是可再生能源方面的。亚投行的环境和社会保障措施中也明确地提到了气候变化。国际伙伴们(如联合国环境规划署和英格兰银行等)也在与中国金融机构合作,对此类项目和政策进行支持。
但是,中国不能只是鼓励和支持新的绿色金融领袖,还要防止落后者将低质量、重污染的基础设施转移到其他发展中国家。比如,那些在国内受到严格限制的火电企业正在瞄准东南亚和非洲市场,对此要严加防控。
有两项切实的措施可以大力提升中国在气候方面的领导力。第一,中国政府可以不止在口头上支持“绿色”基础设施,还明确规定只有符合巴黎协定目标的项目才能得到亚投行、金砖银行,尤其是“一带一路”计划的资金支持。将气候风险和2C兼容性测试作为新项目遴选的正式标准。这一做法所发出的强大经济信号将远远超出中国的国界。
第二,中国应该像在国内一样积极禁止本国企业在海外进行高碳、低效的投资。只有将所有海外投资纳入监管范围,而非仅仅着眼于旗舰绿色项目,中国才能展现出可靠的绿色金融领导力。
习近平主席将2015年的《巴黎协定》称为“气候治理进程中的里程碑”,承诺将坚决兑现中国在此框架下的承诺。但是,正如乔安娜·刘易斯和李硕在“中外对话”文章中指出的那样,全球领导者不仅需要尽好自己的本分,还要拥有更广阔的视野,激励和引导其他国家踏上正轨。
问题在于如何才能做到这一点。中国的外交立场不太可能在一夜之间改变。因此,要实现成为全球治理领导者的雄心,保护“来之不易”的巴黎协定,中国必须探索气候领导的新道路。幸运的是,如徐安琪和卡琳·罗森加滕在中外对话文章中所说,可以用“实际领导”对传统的外交领导进行补充。实际上,在不断演变的气候体制中,“实际领导”已经变得越来越重要。在此语境下,城市和商业网络以及海外基础设施投资等非传统的外交影响渠道为中国铺设了坚实的前进道路。
由内而外的领导力
尽管中国口头上说将负起领导责任、支持巴黎协定,但还没有迹象表明它将在外交上积极推动国际气候体制的强化,或者督促其他国家扩展气候宏图。因为这些措施对中国来说是外交上的一个重大转折,如果出现,也只会以缓慢渐进的方式出现。同时,中国也不太可能正式将巴黎协定中承诺的在2030年达到排放峰值的时间提前。
那么中国怎样才能在全球气候政策中发挥积极而坚定的作用呢?这就亟需为其找到超越传统外交的气候领导新路径。幸运的是,中国政府手上已经有了新的政策工具。
自下而上的行动潜力
采取气候行动的不仅是各国政府,城市、企业、社会团体和其他非国家行为主体也都在努力应对气候变化(如今都集结在联合国的气候问题解决方案非国家行动者(NAZCA)平台之下)。2015年的联合国巴黎气候大会在政府间机制的中心掀起了一场非国家气候行动的“海啸”。
尽管这一变化是一个重要突破,但仍面临着巨大的挑战。未来世界上大部分排放将来自发展中国家,同时它们也将遭受气候变化最严重的打击。但研究表明大多数非国家气候行动仍然集中在发达国家;而那些自下而上将各国的非国家行为体联系起来的气候倡议也主要是由发达国家行为体发起和领导的。
在国际层面,中国似乎远远落在后面。中国的总排放量是印度的五倍,但在跨国网络中采取气候行动的印度城市、省邦、企业和其他非国家行为体的数量却是中国的两倍之多。
但在地方层面上,中国开展了大量气候行动,国有和私有企业同样积极。比如,中国达峰先锋城市联盟的宗旨就是赶在国家目标之前达到城市的排放峰值。但是,这项行动的大部分与国际网络并无联系。因此,中国政府可以通过帮助本国的地方行为主体在跨国网络中发挥更大作用,来强化国内政策,彰显其国际领导地位。
让中国的省、市、以及企业更有力地融入各个跨国气候行动网络(如C40气候城市领导联盟、全球商业气候联盟和Compact of States and Regions等),可以迅速拓宽这些网络的覆盖面,同时给中国的地方和非国家行为主体带来重要的信息、人脉和融资机遇。
通过这种方式,中国不必实质上改变其传统谈判立场也能迅速提升其国际气候领导力。中国政府发出参与这些网络的有力信号也将鼓励省、市、企业进一步开展气候行动,并将其与全世界(尤其是其他发展中国家)的同道们联系在一起。
有些人担心“自下而上”的方式将导致权力从中央政府转移到地方政府和企业手中,但这种担忧是有偏差的。城市和商业网络的自发性和合作性意味着它们不仅不会威胁到国家主权,反过来还会帮助各国政府更有效地实现其承诺的国家目标,同时以明显的进展证据来支撑国家的外交立场。
“绿化”海外基础设施投资
中国正在成为很多国家最大的基础设施投资来源。通过亚洲基础设施投资银行(亚投行)、新开发银行(金砖银行)等机构和“一带一路”计划,以及中国的国家开发银行和大型商业银行的贷款和基础设施建设企业的行动,未来若干年中国将在很多国家的基础设施选择中发挥决定性作用。
坦率地说,如果这个影响力转化为碳密集的基础设施,将让巴黎协定的目标化为泡影。但若非如此,它也可能为世界经济未来数十年的去碳化提供所需的大笔资金。
幸运的是,中国非常重视绿色金融。亚投行和金砖银行首批开展的一些项目都是可再生能源方面的。亚投行的环境和社会保障措施中也明确地提到了气候变化。国际伙伴们(如联合国环境规划署和英格兰银行等)也在与中国金融机构合作,对此类项目和政策进行支持。
但是,中国不能只是鼓励和支持新的绿色金融领袖,还要防止落后者将低质量、重污染的基础设施转移到其他发展中国家。比如,那些在国内受到严格限制的火电企业正在瞄准东南亚和非洲市场,对此要严加防控。
有两项切实的措施可以大力提升中国在气候方面的领导力。第一,中国政府可以不止在口头上支持“绿色”基础设施,还明确规定只有符合巴黎协定目标的项目才能得到亚投行、金砖银行,尤其是“一带一路”计划的资金支持。将气候风险和2C兼容性测试作为新项目遴选的正式标准。这一做法所发出的强大经济信号将远远超出中国的国界。
第二,中国应该像在国内一样积极禁止本国企业在海外进行高碳、低效的投资。只有将所有海外投资纳入监管范围,而非仅仅着眼于旗舰绿色项目,中国才能展现出可靠的绿色金融领导力。
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